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प्रेस विज्ञप्ति
जिले की पंचायत समिति / नगरीय क्षेत्र/ग्राम पंचायत में आधार नामांकन एवं अद्यतन केन्द्र स्थापित किए जाने प्रस्तावित हैं। सूचना प्रौद्योगिकी संयुक्त निदेशक अशोक आसेरी ने बताया कि उक्त आधार केन्द्रों पर नामांकन और अद्यतन कार्य करने हेतु रजिस्ट्रार (सूचना प्रौद्योगिकी और संचार विभाग) के अधीन नामांकन एजेन्सी (राजकॉम्प इन्फो सर्विसेज लिमिटेड) द्वारा ऑपरेटर को यूआईडीएआई, नई दिल्ली से आधार (पंजीकरण एवं अपडेट) विनियम 2016 के अनुसार कार्य करने हेतु आईडी/क्रिडेंशियल जारी कराया जाना प्रस्तावित है। जो भी पात्र व्यक्ति नामांकन ऑपरेटर के रूप में यूआईडीएआई, नई दिल्ली एवं सूचना प्रौद्योगिकी और संचार विभाग, राजस्थान द्वारा निर्धारित निर्बन्धनों एवं शर्तों के अनुसार कार्य करने का इच्छुक है, वह अपना आवेदन ऑनलाइन स्वयं की SSO आईडी से G2C में RAJAADHAAR PORTAL के माध्यम से 10 जून से 24 जून तक कर सकता है।
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जयपुर
प्रदेश में अल्पकालीन सहकारी फसली ऋण भुगतान अवधि बढ़ी
Published by -
जगदीशराम जाखड़
on -
Wednesday, April 15, 2026
अल्पकालीन सहकारी फसली ऋण भुगतान अवधि बढ़ी, 15 मई या 12 माह तक ब्याज मुक्त ऋण भुगतान की …
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फलोदी जिले के खीचन और उदयपुर के मेनार गांव रामसर साइट घोषित जेके राजस्थान न्यूज | केलनसर : विश्व पर्यावरण दिवस ( 5 जून ) से पूर्व बुधवार की संध्या को भारत के केंद्रीय पर्यावरण और वन मंत्री ने घोषणा करके कहा है कि भारत में राजस्थान के फलोदी जिले के खीचन की आर्द्रभूमि और उदयपुर जिले के मेनार गांव (बर्ड गाँव) को रामसर साइट के रूप में मान्यता दी गयी है। खीचन में सर्दी के समय प्रत्येक वर्ष साइबेरिया से असंख्यक झुण्ड के रूप में साइबेरियन कुरजां अपना पड़ाव डालती है क्योंकि ये खीचन की आद्रभूमि वातावरण और पर्यावरण के अनुकूलन है, जिले में लाखों की संख्या में कुरजां के भ्रमण के कारण यहां पर्यटन, संस्कृति, कला, और फलोदी जिले का सामरिक महत्व और अधिक व्यापक स्तर पर बढेगा। खीचन व मेनार को विश्व स्तर पर पहचान : मेनार गाँव प्रदेश व देश का एकमात्र "विश्व में छाया बर्ड गाँव" के रुप में जाना जाता है यहाँ हमेशा बर्ड सुबह से शाम तक देखा जा सकता है। फलोदी जिले के खीचन और उदयपुर के मेनार गाँव को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मिलेगी पहचान, सैंकड़ो देशी व विदेशी सैलानियों का जमावड़ा रहेगा, राजस्थान के दोनों वेटलैण्ड स्थलों की इंटरनेशनल स्तर पर वैश्विक पहचान। भारत में अब 5 जून 2025 तक के आंकड़ों के अनुसार रामसर साइट की संख्या 91 हो गई है, वहीं राजस्थान में 2 से बढकर 4 रामसर साइट हो चुकी है। रामसर साइट क्या है : रामसर साइट एक ऐसी जगह है जो अंतर्राष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमि होती है, जिसे रामसर कन्वेंशन के तहत संरक्षित किया जाता है। रामसर कन्वेंशन एक अंतर्राष्ट्रीय संधि है जिसका उद्देश्य आर्द्रभूमियों का संरक्षण और स्थायी उपयोग करना है।
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